साइबर फ्रॉड की FIR किसी दूसरे राज्य में दर्ज हो और पुलिस का नोटिस लखनऊ या उत्तर प्रदेश में आपके घर पहुँच जाए, तो घबराना स्वाभाविक है। नीचे वे सवाल हैं जो लोग सबसे ज़्यादा पूछते हैं।
यह थोड़े समय की अंतरिम सुरक्षा है। इसका मतलब है कि FIR किसी दूसरे राज्य में दर्ज है, फिर भी आप अपने निवास वाले राज्य की सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट से गिरफ्तारी से कुछ समय की राहत माँग सकते हैं, ताकि आप FIR वाली अदालत में जाकर नियमित अग्रिम ज़मानत ले सकें। सुप्रीम कोर्ट ने Priya Indoria v. State of Karnataka, 2023 INSC 1008 में इसे मान्यता दी है।
कानून में कोई तय अवधि नहीं है। यह जज के विवेक पर निर्भर करता है। अलग-अलग हाईकोर्ट ने साइबर मामलों में आमतौर पर 14-15 दिन से लेकर 3-4 हफ्ते तक की सुरक्षा दी है। Priya Indoria में खुद सुप्रीम कोर्ट ने चार हफ्ते तक कोई कठोर कार्रवाई न करने का निर्देश दिया था। इस अवधि के अंदर आपको FIR वाली अदालत में जाना होता है।
पूरी तरह नहीं। इसका दायरा सीमित है:
पहले FIR की जानकारी जुटाएँ, क्योंकि कोर्ट ठोस तथ्य देखती है।
आप जिस राज्य में रहते या काम करते हैं, वहाँ की सेशन कोर्ट या हाईकोर्ट में। लखनऊ के लोगों के लिए यह लखनऊ की सेशन कोर्ट या इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच हो सकती है। कोर्ट आपका उस जगह से असली संबंध (निवास या काम) देखती है, और यह भी कि आप FIR वाली अदालत तुरंत क्यों नहीं जा सकते।
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